हार कर इस ज़िन्दगी से मुंह मोड़ लेते हैं लोग यों के जीलेने की हसरत ही छोड़ देते हैं लोग ! वहीं, हाँ वहीं सुखन-ए-ज़ालिम रंग लाता है कि जहां थक के अक्सर दम तोड़ देते हैं लोग !!
Posted in Bhai Wah !
baaz
June 11, 2010 at 11:03 am
जब कभी अपनों के अफसानों से भर जाता है जी कैसे कैसे वाकये गैरों से जोड़ देते हैं लोग …
June 11, 2010 at 11:06 am
कितने घर बर्बाद हैं कितने ही जल कर राख हैं नासमझ हैं आदतन शोलों को होड़ देते हैं लोग …
baaz
June 11, 2010 at 11:03 am
जब कभी अपनों के अफसानों से भर जाता है जी
कैसे कैसे वाकये गैरों से जोड़ देते हैं लोग …
baaz
June 11, 2010 at 11:06 am
कितने घर बर्बाद हैं कितने ही जल कर राख हैं
नासमझ हैं आदतन शोलों को होड़ देते हैं लोग …