बड़ी मुद्दत के बाद आज नज़र आई है एक सूरत तेरे चेहरे पे उतर आई है..
Posted in Kahi-Suni
बहुत उदास है यारों अवध की शाम आज चलो ज़ालिम के कहीं और चल के बैठेंगे
कहने को है बहुत कुछ और भी लेकिन ज़ालिम छलक जाती है नज़र हाथ से लिखता भी नहीं..